🌞 मकर संक्रांति का महत्व🌞
हमारे भारत में हिन्दुओं के प्रमुख पर्वों में से एक है। मकर संक्रांति पूरे *भारत और नेपाल में भिन्न भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास(धनु राशि) से जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उसी दिन इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार आंग्ल तिथि जनवरी माह के १४ या १५ को ही पड़ता है किन्तु अब खगोलीय प्रतिक्रिया के कारण कुछ वर्षों तक यह १५ जनवरी को ही पडेगी। इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करते है। तमिलनाडु में पोंगल नाम से उत्सव को मनाया जाता हैं जबकि कर्नाटक, केरल, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल *संक्रांति ही कहते हैं। बिहार के कुछ जिलों में यह पर्व तिला संक्रांत नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण या उत्तरायणी भी कहते हैं। प्रकृति का नियम मुख्यतः पृथ्वी निरंतर मन तक दक्षिणायन अर्थात उत्तर से दक्षिण की मिथुन से कर्क पुनः धनु से मकर दक्षिण से उत्तर इसे ही उत्तरायण कहते हैं यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भगवान सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर में प्रवेश करते हैं। सूर्यनारायण अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं इसी समय उनके घर जाते हैं। शनि कुम्भ राशि के स्वामी है सूर्य का अपने पुत्र शनि से किसी कारण विवाद होता है क्रोध में सूर्यदेव, शनि का घर जला देते हैं। सूर्य की पत्नी छाया शनि की मां ने बीच बचाव कर छमा याचना की इस प्रकार सूर्य देव ने शनिदेव को एक नया घर मकर दिया और पुराना भी प्रदान किया इस प्रकार शनि मकर व कुम्भ के स्वामी हुए । इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। राजा भगीरथ के तप से पवित्र गंगा नदी का भी इसी दिन धरती पर अवतरण हुआ था।
महाभारत में पितामाह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था। इससे सिद्ध होता है कि उत्तरायण में देह छोड़ने वाली आत्माएं या तो कुछ काल के लिए देवलोक में चली जाती हैं या पुनर्जन्म के कालचक्र से छुटकारा मिल जाता है। जबकि दक्षिणायण में देह छोड़ने पर आत्मा को पुनः जन्म लेना पड़ सकता है।
स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में कही है। सूर्य उत्तरायण होते ही माँ पृथ्वी भी सनातनी भारतीय हिन्दू नववर्ष की तय्यारी में लीन हो जाती है। खेत हरे भरे विविध प्रकार के फूलों पेड़ों में नयी कलियाँ नये पत्ते बौर आदि निकालने लगते हैं।
हृदयतल से आशीर्वाद एवं मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ सभी सपरिवार सदैव स्वस्थ रहें प्रगतिशील बने रहें। ॐ भूर्भुवः स्वः रक्त वर्णाय काश्यप गोत्राय सूर्याय नमः


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